हम न भूलें / Hum Naa Bhooleen

वैलेंटाइनस दिवस / Valentine’s day

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वैलेंटाइन्स दिवस, या संत वैलेंटाइन्स दिवस अथवा संत वैलेंटाइन पर्व प्रतिवर्ष १४ फरवरी को मनाया जाता है। ईसाई संत वैलेंटाइन के जीवन के बारे में कई किंवदंतियां हैं। सर्वाधिक प्रचलित कहानी के अनुसार तीसरी शताब्दी की १४ फरवरी को रोमन सम्राट क्लॉडियस (२) द्वारा संत वैलेंटाइन का सिर कलम कर दिया गया था। संत वैलेंटाइन रोमन साम्राज्य में सताए जा रहे ईसाइयों की मदद करते थे व गुप्त रूप से ईसाई जोड़ों का विवाह भी कराते थे। कहानी के अनुसार, वैलेंटाइन जब सम्राट क्लॉडियस की कैद में थे तब उन्होंने क्लॉडियस को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का प्रयास भी किया था जिस कारण क्लॉडियस क्रोधित हो गया था और उसने वैलेंटाइन को अपने विश्वास को अस्वीकार करने अथवा मृत्यु का आदेश दिया था। (कुछ इतिहासकारों अनुसार वैलेंटाइन नाम के एक से अधिक लोगों को क्लॉडियस (२) द्वारा मारा गया था।) वैलेंटाइन और उनके जीवन के बारे में अस्पष्टता होने पर भी कैथोलिक चर्च ने उन्हें एक संत घोषित किया और उन्हें १४ फरवरी को शहीद के रूप में सूचीबद्ध किया। एक अन्य कहानी के अनुसार वैलेंटाइन ने अपने कारावास के समय जेलर की अंधी बेटी जूलिया को पढ़ाया था। कहा जाता है कि जब जूलिया और वैलेंटाइन ने एक साथ प्रार्थना की तो भगवान ने जूलिया की दृष्टि लौटा दी। अपने निष्पादन की पूर्व संध्या पर, वैलेंटाइन ने जूलिया को एक पत्र लिखा और उस पर हस्ताक्षर किए, ‘तुम्हारे वैलेंटाइन की ओर से’।


रोमन साम्राज्य में उस समय प्रति वर्ष १५ फरवरी को रोम में 'लुपरकेलिया' नाम से एक प्राचीन मूर्तिपूजक उत्सव मनाने की प्रथा थी। यह उत्सव शहर को शुद्ध करने, स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता था। वसंत के आगमन को मनाने के साथ प्रजनन संस्कार व महिला-पुरुष की जोड़ी बनाना भी इसमें शामिल था।


५ वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में, पोप गेलैसियस (१) ने ‘लुपरकेलिया के मूर्तिपूजक उत्सव को समाप्त कर दिया और १४ फरवरी को संत वैलेंटाइन की शहीदी का पर्व मनाने के लिए घोषित किया। इसकी बहुत कम संभावना है कि पोप गेलैसियस इस दिवस को 'प्रेम का दिवस' के रूप में मनाने का इरादा रखते थे। परन्तु "प्रेमियों के संरक्षक" के रूप में प्रतिष्ठित होने से संत वैलेंटाइन प्रेम (युवा जोड़ों के बीच रोमांस) के पर्याय बन गए।


वास्तव में, आधुनिक समय के कुछ बाइबल के विद्वान ईसाइयों को वैलेंटाइन्स दिवस नहीं मनाने की चेतावनी देते हैं क्योंकि वे इसे लुपरकेलिया के अनुष्ठानों पर आधारित मानते हैं। उनके अनुसार समकालीन समय में 'कुपिड' जो रोमांटिक प्रेम को प्रेरित करने के लिए अपना धनुष खींचते हुए वेलेंटाइन डे के प्रतीक के रूप में दिखाया जाता है, वास्तव में कामुक प्रेम व इच्छा, आकर्षण और स्नेह दर्शाने वाला एक रोमन देवता है। वैलेंटाइन्स दिवस पर उपहारों का लाल रंग 'लुपरकेलिया' के समय के रक्त बलिदान का द्योतक है व सफेद रंग रक्त को साफ करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले दूध को दर्शाता है जो उस समय नए जीवन व प्रजनन का प्रतिनिधित्व करता था।


रोमांटिक प्रेम के साथ वैलेंटाइन्स दिवस का पहला लिखित प्रमाण १३८२ में जेफ्री चौसर द्वारा रचित काव्य 'पक्षियों की संसद' को माना जाता है। इस कविता में पक्षियों को अपने साथी चुनने के लिए एक संसद को चित्रित किया गया है। यह काव्य चिन्हित करता है कि वैलेंटाइन्स दिवस प्रेमियों के लिए एक विशेष दिन है। (संभवत: प्रेमी-युगल के लिए प्रयोग किए जाने वाले शब्द 'लवबर्ड्स' का इस कविता से कुछ संबंध हो।) विश्व में वैलेंटाइन्स दिवस के औपचारिक संदेश १६ वी. शताब्दी में दिखाई दिए और १८ वी. शताब्दी के अंत तक व्यावसायिक रूप से मुद्रित कार्ड का उपयोग किया जाने लगा। वर्तमान में संसार के कई क्षेत्रों में वैलेंटाइन्स दिवस रोमांस और प्रेम का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और व्यावसायिक उत्सव बन गया है।


भारत १९९२ के आसपास तक वैलेंटाइन्स दिवस से अनभिज्ञ था। १९६६ व १९८० के दशक के आरम्भ में भारतीय आर्थिक उदारीकरण के असफल प्रयासों के पश्चात १९९१ में प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव की सरकार ने एक बार फिर आर्थिक उदारीकरण का आरम्भ किया। इस बार का उदारीकरण पहले से गहन व आधुनिकीकरण के साथ था। इस उदारीकरण व आधुनिकीकरण के समय में भारत में विदेशी वाणिज्यिक टी. वी. चैनलों का भी आगमन हुआ। जहां एक ओर 'एम टी वी', समर्पित रेडियो कार्यक्रम और प्रेम पत्र प्रतियोगिताओं ने वैलेंटाइन्स दिवस के प्रचार व प्रसार में योगदान दिया वहीं वैलेंटाइन्स कार्ड उद्योग ने तो इसके प्रचार में विस्फोट ही कर दिया।


इंडोनेशिया में अधिकारियों और मौलवियों ने वैलेंटाइन्स दिवस को 'इस्लामी संस्कृति का हिस्सा नहीं' बताते हुए प्रतिबंधित किया है तो पाकिस्तान ने उच्च न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर वैलेंटाइन्स दिवस के समारोह पर प्रतिबंध लगाया है। ईरान में २००९ से ही वैलेंटाइन्स दिवस पर फूल, कार्ड, या अन्य उपहार देना प्रतिबंधित हैं।


वर्तमान में वैलेंटाइन्स दिवस पर युवक ही युवतियों के प्रति अपना प्रेम प्रकट करते हैं व युवतियाँ ऐसे में प्रेम प्रकट करने वाले युवक से किसी न किसी उपहार की आकांक्षा ही नहीं रखतीं अपितु उपहार को अनिवार्य मानती हैं। इस अवधारणा के चलते वैलेंटाइन्स दिवस की प्रतिक्रिया के रूप में पुरुष १४ मार्च को 'स्टेक व कनौब्बर दिवस' के रूप में मान्यता दिलवाने के लिए अग्रसर हैं। इस दिवस का आव्हान सर्वप्रथम २००२ में अमेरिका में हुआ था और आज यह दिवस यूरोप के देशों में भी अपनी पकड़ बना रहा है। इस दिन पुरुष, महिलाओं को वैलेंटाइन्स दिवस पर दिए गए उपहारों के उत्तर में युवती के पकाए भोजन व यौन संबंध की अपेक्षा रखते हैं। पुरुषों की इस प्रकार के एक दिन बनाने की अवधारणा ने विवाद उत्पन्न कर दिया है और महिलाओं के विरोध को उकसाया है। महिला संगठनों द्वारा इसे नारी-विरोधी व पितृसत्तात्मक के रूप में वर्णित किया जा रहा है।


यह कैसी प्रेम की अभिव्यक्ति है कि जहाँ एक ओर महिला पुरुष के प्रेम उजागर करने के लिए उससे किसी उपहार की आकांक्षा रखती है और प्रेम की तीव्रता का आँकलन उपहार की कीमत से होता है तो वहीं अपने इस उपहार के उत्तर में पुरुष महिला से भोजन व यौन-संबंध की अपेक्षा रखता है। यह कैसी संस्कृति है जहां प्रेम की अभिव्यक्ति लेन-देन पर आधारित है न कि एक-दूसरे के प्रति भावनाओं, आदर व त्याग पर।


क्या यह आर्थिक उदारीकरण व आधुनिकीकरण का परिणाम है कि जीवन में भावनाओं का मूल्य कम और वे दुर्लभ हो रहीं हैं वहीं भौतिक पदार्थों को पाने की ईच्छा नित बढ़ती ही जा रही है।


हम न भूलें कि

  • किसी दिवस को विशेष दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य यदि आरम्भ से ही निश्चित न हो तो समय के अंतराल में उसका विकृत होना अवश्य निश्चित है।

  • किसी उत्सव अथवा जयंती को मनाते समय उसके मूल उद्देश्य को न भूलें। समय के साथ मनाने के रूप-ढंग में अंतर आना संभव है परन्तु उसके ‘कारण व उद्देश्य’ में नहीं।

  • प्रेम के पौधे को आदर, त्याग, समर्पण व एक दूसरे की भावनाओं की समझ से ही सींचा जा सकता है। प्रेम 'भौतिक' नहीं, जिसे भौतिक पदार्थों से सम्पन्न किया जा सके।

  • यूरोप के ईसाई देशों में वैलेंटाइन्स दिवस किसी विशेष दिवस की भांति प्रचलित नहीं है। न ही वर्तमान में कोई गिरजाघर इसे प्रार्थना-सभा अथवा किसी अन्य रूप से मनाता है।

  • अपनी संस्कृति को जानने, पहचानने व समझने की चेष्टा न करना और अज्ञान में दूसरों का अनुकरण कदाचित शोभनीय नहीं है।

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Valentine’s day

Valentine's Day, also called Saint Valentine's Day or the Feast of Saint Valentine is celebrated every year on 14th February. There are many legends about the life of the Christian Saint Valentine. According to the most popular story, Saint Valentine was beheaded by the Roman emperor Claudius II on 14th February in the third century. Saint Valentine used to help persecuted Christians in the Roman Empire and he also used to secretly conduct the marriage of Christian couples. According to the story, Valentine attempted to convert Emperor Claudius II to Christianity when he was imprisoned by him, which enraged Claudius and he ordered Valentine either to reject his faith or die. (According to some historians, more than one person named Valentine were killed by Claudius II.) Despite the ambiguity about Valentine and his life, the Catholic Church declared him a saint and listed him as a martyr on 14th February. According to another story during his imprisonment, Valentine tutored the jailer's blind daughter Julia. It is said that when Julia and Valentine prayed together, God restored Julia's sight. On the eve of his execution, Valentine wrote a letter to Julia and signed it, ‘From Your Valentine’.


During the Roman Empire at that time, it was customary to celebrate an ancient pagan festival called 'Lupercalia' in Rome on 15th February every year. The festival was celebrated to purify the city, promote health and fertility. Along with celebrating the arrival of spring, it also included fertility rites and pairing of male and female.


In the late 5th century, Pope Gelasius I abolished the pagan celebration of ‘Lupercalia’ and declared 14th February to be the feast of the martyrdom of Saint Valentine. It is very unlikely that Pope Gelasius I intended to celebrate this day as a 'day of love'. But being revered as the "guardian of lovers", Saint Valentine became synonymous with love (romance between young couples).


In fact, some modern-day Bible scholars warn Christians not to celebrate Valentine's Day because they believe it to be based on old pagan rituals. According to them in contemporary times 'Cupid', the little boy drawing his bow to inspire romantic love, depicted as a symbol of Valentine's Day is actually a Roman deity representing sensual love and desire, attraction and affection. The red color of the gifts on Valentine's Day signifies the blood sacrifice at the time of 'Lupercalia' and the white color represents the milk used to purify the blood which at that time represented new life and fertility.


The first written evidence of Valentine's Day with romantic love is considered to be the poem 'Parliament of Fowls' composed by Geoffrey Chaucer in 1382. In this poem a parliament is depicted asking the birds to choose their mates. This poem contains references to the idea that Valentine’s Day is a special day for lovers. (Probably the phrase 'Lovebirds' used for lovers may have some association with this poem). Formal Valentine's Day messages appeared during the 16th century, and by the end of the 18th century commercially printed cards were used. Currently, Valentine's Day has become an important cultural and commercial celebration of romance and love in many regions of the world.


India was unaware of Valentine’s Day until around 1992. After unsuccessful attempts of liberalisation of Indian economy in the 1960s and early 1980s, Prime Minister P. V. Narasimha Rao's government started once again with the economic liberalisation in 1991. The liberalisation this time was deep along with modernisation. During this era of liberalisation and modernisation, India witnessed the arrival of foreign commercial TV channels in India. While 'MTV', dedicated radio programs and love letter contests contributed to the promotion and spread of Valentine's Day, the Valentine printed card industry exploded its spread.


Authorities and clerics in Indonesia have banned Valentine's Day saying that it is "not part of Islamic culture", while Pakistan has banned the celebration of Valentine's Day in public places on the direction of the High Court. Giving flowers, cards, or other gifts on Valentine's Day is already prohibited in Iran since 2009.


At present, on Valentine's Day, only young men express their love for the girls. The girls just do not expect some gift from the young man who expresses his love but consider the gift to be essential. This expectation has led men to recognize 14th March as 'Steak and Knobber Day' as a response to Valentine's Day. This day was first conceived in 2002 in America and today it is catching up in the European countries. On this day men, in response to the gifts given to women on Valentine's Day, expect the girl to cook food and have sex with them.


This suggestion of such a day by men has generated controversy and provoked protests from women. It is being criticised by women organizations as anti-feminist and patriarchal.


What kind of expression of love is this that while on the one hand the woman aspires for a gift from a man to reveal his love whereby the price of the gift is the index of the intensity of love. On the other hand in response to this gift, the man expects that the woman will make him happy with food and sex? What kind of culture is this where the expression of love is based on exchange and not on feelings, sacrifice and respect for each other?


Is it the result of economic liberalisation and modernisation that the value of feelings in life is decreasing and with time they are becoming rare, whereas the desire to get material things is increasing day by day.


Let us not forget that

  • If the purpose of celebrating any day as a special day is not clear from the beginning, then it is sure to get distorted over time.

  • While celebrating any festival or anniversary, do not forget its original purpose. It is possible that way of celebration may change with time, but not the reason and purpose.

  • Love can be nurtured only by respect, sacrifice, dedication and understanding of each other's feelings. Love is not 'material', which can be accomplished with material things.

  • In the European countries, Valentines Day is not as prevalent as any special day. Nor does any church celebrate it by offering prayer or in any other way.

  • It is probably not worth to imitate others while not trying to know, recognize and understand one’s own culture

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