हम न भूलें / Hum Naa Bhooleen

नवरात्रि व विजयदशमी / Navratri and Vijaydashmi

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भारत निश्चित ही विविधताओं में एकता का देश है। भिन्न-भिन्न क्षेत्रों की भिन्न जलवायु, भिन्न भाषा, भिन्न वेश-भूषा, भिन्न खान-पान और यहां तक कि शारीरिक रंग-रुप की भिन्नता भी भारत में स्पष्ट देखने को मिलती है। तो फिर वह क्या है जो इतनी विविधताएं होते हुए भी सबको एक साथ बांधे हुए है। निःसंकोच यह हिंदु जीवन शैली, हिन्दुत्त्व ही है जो इन भिन्न पुष्पों को माला में गूँथ कर इन्हे एक साथ तो संजोए ही रखता है, इन्हे एक नया रुप देता है पर इनकी स्वयं की सुंदरता और विविधता को कदाचित कम नहीं होने देता।


उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।

वर्षं तद् भारतं नाम, भारती यत्र सन्तति॥ (विष्णु पुराण)


अर्थ: समुद्र के उत्तर में व हिमालय के दक्षिण में जो वर्ष (भू-भाग) स्थित है, उसका नाम भारत है और उसकी संतति (संतान, प्रजा) को भारती कहते हैं।


विविधताओं के होने से ही भारत के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में एक ही पर्व भिन्न-भिन्न रुप से मनाया जाता है। नवरात्रि का पर्व भी इनमें से एक है। नवरात्रि (नौ रातें) का समय वर्ष में चार बार शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है।

  • चैत्र - नवरात्रि (मार्च - अप्रैल; भारतीय नववर्ष )

  • आषाढ - नवरात्रि (जून - जुलाई; वर्षा-ऋतु, मानसून आरम्भ)

  • शरद - नवरात्रि (सितंबर-अक्टूबर; अश्विन मास, शरद-ऋतु आरम्भ)

  • माघ - नवरात्रि (जनवरी - फरवरी; पांचवे दिन बसंत पंचमी)


इन चार नवरात्रियों में हिन्दू समाज ने शरद नवरात्रि के पर्व को सबसे अधिक महत्त्व दिया है व इसे अत्यधिक हर्षोल्लास से मनाया जाता है।


शरद नवरात्रि के समय, शक्ति (देवी) के नौ रुपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन विजयदशमी के नाम से प्रसिद्ध है। यह पर्व मुख्यत: देवी दुर्गा के भिन्न रुपों की उपासना का पर्व है परन्तु सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश और कार्तिकेय आदि अन्य देवी-देवता भी क्षेत्रीय रुप से पूजे जाते हैं।


भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर बंगाल के हिंदुओं के लिए "नवरात्रि" शक्ति के "योद्धा-देवी" के रुप में दुर्गा की पूजा है। भारत के अन्य क्षेत्रों में, नवरात्रि शक्ति की देवी दुर्गा का ही उत्सव है, परन्तु उनके अधिक शांतिपूर्ण रुप सरस्वती - ज्ञान, शिक्षा, संगीत और अन्य कलाओं की देवी रुप में। नेपाल में, नवरात्रि को "दशैन" कहा जाता है, और यह एक प्रमुख वार्षिक घर वापसी और पारिवारिक कार्यक्रम है जो टीका पूजा के साथ-साथ परिवार और समुदाय के सदस्यों के साथ बड़ों और युवाओं के बीच के बंधन को दर्शाता है।


बंगाल में दुर्गा-पूजा का आरम्भ 'महालय' (देवी दुर्गा का आगमन) से होता है। छ:वे दिन (षष्ठी) स्थानीय समुदाय देवी दुर्गा का स्वागत करता है और उत्सव समारोह का उद्घाटन किया जाता है। सातवें (सप्तमी), आठवें (अष्टमी) और नौवें (नवमी) दिन, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय के साथ दुर्गा की पूजा होती है। दसवें दिन (विजयदशमी) एक विशाल शोभा-यात्रा निकाली जाती है, जहां दुर्गा की मिट्टी की मूर्तियों को एक नदी या समुद्र तट पर विदाई के लिए ले जाया जाता है और उन्हें जल में विसर्जित किया जाता है।


उत्तर भारत में नवरात्रि रामलीला का समय है जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन को रंगमंच पर दर्शाया जाता है। नवरात्रि के अंत में दशहरा (विजयदशमी) को रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाते हैं। किन्ही स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान के रुप में देवी दुर्गा के बुराई (अधर्म) के विरुद्ध युद्ध को स्मरण किया जाता है। घर में किसी पवित्र स्थान पर घड़ा स्थापित (घटस्थापना) किया जाता है। थाली में एक दीपक नौ दिनों तक जलाया जाता है। यहाँ घड़ा ब्रह्मांड का प्रतीक है और निरंतर जलता हुआ दीपक दुर्गा का प्रतीक है।


पश्चिम भारत में गुजरात में नवरात्रि का पर्व सबसे लोकप्रिय है और गुजरात में नवरात्रि समारोह वर्तमान में डांडिया और गरबा के रूप में जान पड़ता है।

पूर्वकाल में मिट्टी के छेद वाले घड़े में दीप जलाया जाता था जिसे 'दीपगर्भ' कहते थे। प्रतीकात्मक यह घड़ा गर्भ व दीपक स्वयं की आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। समय के साथ बदलाव आए और आज इसे 'गरबो' कहा जाता है। देवी के निकट इस घट को स्थापित करने हेतु श्रद्धालु क्रम से नृत्य करते हुए जाते थे जिससे इस नृत्य का नाम 'गरबा' पड़ा। नवरात्रि के सभी नौ दिनों में मिट्टी के सछिद्र घड़े को फूल-पत्तियों से सजाकर लोग उसके चारों ओर गरबा करते हुए वृत्त बनाते हैं। ऐसे में मंडलियां बढ़ या सिकुड़ सकती हैं और नृत्य-मंडलीसैकड़ों या हजारों लोगों के आकार तक भी पहुंच सकती हैं।


महाराष्ट्र में नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना होती है, जिसमें चावल के एक छोटे से ढेर पर पानी से भरा एक तांबे या पीतल का घट अन्य कृषि प्रतीकों जैसे हल्दी की जड़, आम के पेड़ की पत्तियां, नारियल, और प्रमुख प्रधान अनाज (सामान्यत: आठ प्रकार ) से भर कर रखा जाता है। ज्ञान और घरेलू समृद्धि के प्रतीक के रुप में एक दीपक जलाया जाता है जो नवरात्रि की नौ रातों तक जलता रहता है। प्रतिदिन घट की पूजा की जाती है। कुछ परिवार घटस्थापना के साथ १. व २. दिन काली पूजा, ३, ४, ५, दिन लक्ष्मी पूजा और ६, ७, ८, ९ दिन सरस्वती पूजा करते हैं। आठवें दिन, देवी दुर्गा के नाम पर "यज्ञ" या "होम" किया जाता है। नौवें दिन, पुरुष सभी प्रकार के उपकरणों, अस्त्रों, वाहनों व उत्पादक उपकरणों की पूजा करते हैं।


गोवा के हिंदू नवरात्रि में तांबे के घड़े को नौ प्रकार के अनाज से भरते है और उसे मिट्टी से घेर कर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित करते है। वे देवी दुर्गा की प्रतिमा को एक विशेष रुप से सजाए गए रंगीन चांदी के झूले में रख (कोंकणी में इसे ‘माखर’ कहते है) नौ रातों तक भजन-कीर्तन के साथ झुलाते हैं। इस अनुष्ठान को 'मकरोत्सव' कहा जाता है।


दक्षिण भारत के १० दिवसीय मैसूर दशहरा उत्सव की भव्यता से सभी परिचित हैं व उसे धूमधाम से मनाने की परंपरा ४१० वर्ष से अधिक पुरानी है। जहां हिंदू कर्नाटक, तमिलनाडु व तेलंगाना में नवरात्रि में आयुध पूजा (अस्त्र, कल-उपकरण आदि जिनसे परिवार अपनी आजीविका के साधनों को बनाए रख सके की पूजा) देवी सरस्वती को समर्पित करते है तो केरल के हिंदू नवरात्रि के तीन दिनों (अष्टमी, नवमी और विजयदशमी) में सरस्वती पूजा के रुप में पुस्तकों की पूजा करते है।


माता दुर्गा अथवा पार्वती, शक्ति को दर्शाती है। शक्ति के रुप भिन्न हो सकते है। इन शक्ति के नौ रुपों को, नवों दुर्गा को पापों की विनाशिनी कहा जाता है, हर देवी के अलग अलग वाहन हैं, अस्त्र शस्त्र हैं परन्तु ये सब एक ही हैं। नवरात्रि प्रत्येक दिवस के साथ शक्ति का नया रुप दर्शाते हुए जड़ से चेतन और परम चेतनता (जागृत-अवस्था) के और बढ़ते हुए अज्ञान पर ज्ञान की विजय को भी दर्शाती है।


शक्ति के नौ भिन्न रुप (नव दुर्गा)


१. शैलपुत्री - मिट्टी, जल, वायु, अग्नि, आकाश सब सम्पूर्ण जड़ पदार्थ शैल पुत्री का प्रथम रुप हैं।

२. ब्रह्मचारिणी - जड़ में ज्ञान का प्रस्फुरण, चेतना का संचार शक्ति के दूसरे रुप का प्रादुर्भाव है। प्रत्येक अंकुरण में इसे देखा जा सकता है।

३. चन्द्रघण्टा - तीसरा रुप है यहाँ जीव में स्वर (वाणी) प्रकट होती है जिसकी अंतिम परिणिति मनुष्य में वाणी है।

४. कूष्माण्डा - अर्थात अण्डे को धारण करने वाली; स्त्री का गर्भधारण, गर्भाधान शक्ति है, जिसे समस्त प्राणीमात्र में देखा जा सकता है।

५. स्कन्दमाता - माता-पिता का स्वरुप है, पालने वाली, संरक्षण देने वाली शक्ति है।

६. कात्यायनी - इनका गुण शोध है जो ज्ञान का विस्तार करता है। ये शक्ति का सृजन करतीं हैं।

७. कालरात्रि- देवी का सातवां रुप है जिससे सब चेतन मृत्यु को प्राप्त होते हैं ओर मृत्यु के समय सब प्राणियों को इस स्वरुप का अनुभव होता है।

८. महागौरी - इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है। ये अंधकार से प्रकाश में पहुँचने की प्रतिक हैं। प्रकाश में आते ही सब स्पष्ट हो जाता है और शांति आने लगती है यह शक्ति का वह रुप है जब साधक का विवेक जागृत हो जाता है।

९. सिद्धिदात्री - नौंवा रुप ज्ञान अथवा बोध का प्रतीक है, ज्ञान पाने से ही सही बोध होने पर साधक परम सिद्ध हो जाता है।


हम न भूलें कि


  • नवरात्रि बुराई और प्रचंड प्रकृति पर विजय पाने के प्रतीकवाद से पूर्ण है।

  • नवरात्रि का उत्सव शक्ति और शक्ति का समन्वय बताने वाला उत्सव है।

  • नवरात्रि के नौ दिन शक्ति के भिन्न रुपों की उपासना करके शक्तिशाली बना मनुष्य विजय प्राप्ति के लिए तत्पर रहता है।

  • भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है।

  • प्रत्येक व्यक्ति और समाज के प्राणों में वीरता का संचार हो इस कारण से ही दशहरे का उत्सव ‘विजय-पर्व’ के रुप में मनाया जाता है।

  • हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए मराठा रत्न शिवाजी ने भी औरंगजेब के विरुद्ध इसी दिन युद्ध के लिए प्रस्थान किया था।

  • रावण के दस सिर एक ओर उसके ४ वेदों एवं ६ शास्त्रों के ज्ञान को दर्शाते है वहीं विजयदशमी का यह पर्व हमें काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी (१० विकारों) पर विजय पाने को अग्रसर करता है।


Navratri and Vijaydashmi

ऊपर

India is certainly a country of unity in diversity. Different climates in different regions, different languages, different attires, different food habits and even different physical appearance are also clearly visible in India. In spite of so many variations, what is that which binds everyone together? Undoubtedly, it is the Hindu way of life. It is “Hindutv” that keeps these different flowers bound together in a garland, gives them a new appearance, but does not let their own beauty and diversity to diminish.


uttaram yatsamudrasya himādreschaiva dakshinam

varsham tad bhāratam nām, bhārati yatra santati (Vishnu Puran)


Meaning:The land which is to the north of the sea and to the south of the Himalayas, is Bharat and its people are Bharati.


Due to prevailing diversities, different regions of India celebrate the same festival differently. The festival of Navratri is also one of them. The time of Navratri (nine nights) is celebrated four times a year from ‘pratipadā’ to ‘navami’ of shukla paksha.


  • Chaitr - Navratri (Mar. - Apr.; Indian New Year)

  • Āshādh- Navratri (Jun.- Jul.; onset of monsoon)

  • Sharad - Navratri (Sep. - Oct.; start of winter)

  • Māgha - Navratri (Jan. – Feb.; Basant Panchami on 5th day)


Among these four Navratris, the festival of ‘Sharad Navratri’ is given the highest importance and celebrated with the most enthusiasm.


During ‘Sharad Navratri’, nine forms of ‘Shakti’ (Goddess) are worshipped, the 10th day is famous as ‘Vijayadashami’. This festival is mainly a festival of worshiping different forms of Goddess Durga, but other deities like Saraswati, Lakshmi, Ganesh and Kartikeya, are also worshiped regionally.


For Hindus in the northeastern states of India, especially Bengal, "Navratri" means worshipping Durga in the form of the "warrior-goddess" (Yodha-Devi) of power and energy. In other regions of India, Navratri is a celebration of Durga, the goddess of power, but in her more peaceful forms as Saraswati - the goddess of knowledge, education, music and other arts. In Nepal, Navratri is called "Dashain", and is a major annual homecoming and family event which is celebrated with “Tika Puja” symbolising the bond between elders and youth with family and community members.


Durga-Puja in Bengal begins with 'Mahalay' (arrival of Goddess Durga). On the 6th day (sashti) the local community welcomes Goddess Durga and the festival celebrations are inaugurated. On the 7th (saptami), 8th (ashtami) and 9th (navami) days, Durga is worshiped along with Lakshmi, Saraswati, Ganesh and Kartikey. On the 10th day (Vijayadashmi) a huge procession is taken out, when clay idols of Durga are taken to a river or beach for farewell and immersed in water.


Navratri in North India is the time of Ramlila when the life of Maryada Purushottam Shri Ram is depicted on the stage. At the end of Navratri, on Dussehra (Vijayadashmi), the effigies of Ravan, Kumbhakarn and Meghnath are burnt. In some places, as a religious ritual, the battle of Goddess Durga against evil is remembered. A pitcher is installed (Ghatasthapana) at a holy place in the house and a lamp is lit for nine days. The pitcher is the symbol of the universe and the constantly burning lamp is the symbol of Durga.


The festival of Navratri is most popular in Gujarat in western India. Presently Navratri celebrations in Gujarat are associated with ‘Dandiya’ and ‘Garba’. In previous days a lamp was lit in an earthen pot with holes which was called 'Deepgarbh'. As times changed today it is called 'Garbo'. Symbolically, the pot represents the womb and the lamp represents the soul. To place this pot near the Goddess, the devotees used to dance in sequence and this is how the dance got its name, 'Garba'. During all the nine days of Navratri, people dance in a circle around the ‘Garbo’ (clay pot) decorated with flower and leaves. During the dance the circles can grow or shrink, reaching the size of hundreds or even thousands of people.


In Maharashtra, ‘Ghatasthapana’ takes place on the first day of Navratri, in which a copper or brass pot filled with water is placed on a small pile of rice. Other agricultural symbols such as turmeric root, leaves of the mango tree, coconut, and the main staple grain (usually eight types) are also filled in the pot. As a symbol of knowledge and domestic prosperity, a lamp is kept burning for the nine nights of Navratri and the Ghat is worshiped daily. Some families along with Ghatasthapana worship Goddess Kali on 1st and 2nd day, Goddess Lakshmi on 3rd, 4th and 5th day and Saraswati Puja on 6th, 7th, 8th and 9th day. On the 8th day, a "yagya" or "hom" is performed in the name of Goddess Durga. On the 9th day, men worship all kinds of tools, weapons, vehicles and productive tools.


Hindus of Goa fill a copper pitcher with nine types of grains, cover it with soil and place it in the sanctorum of the temple. They place the idol of Goddess Durga in a specially decorated colored silver swing (in Konkani it is called ‘Makhar’) & swing it with ‘bhajan-kirtan’ for nine nights, which they call 'Makarotsav'.


The 10-day Mysore Dussehra festival of South India has a tradition of over 410 years of granderous celebrations. On 9th day of Navratri Hindus in Karnataka, Tamil Nadu and Telangana dedicate Ayudh Puja (worship of weapons, tools, etc. by which the family can sustain their means of livelihood) to Goddess Saraswati. The Hindu of Kerala on the three days (Ashtami, Navami and Vijayadashami) of Navratri worship books in the form of Saraswati Puja.


Maa Durga or Parvati represents Shakti (Energy). The form of energy may vary. These 9 forms of energy, the Nav Durgas are said to be the destroyers of sins. Each form of goddess has a different vehicle and weapons, but they are all one. Navratri shows a new form of energy, every day depicting the transition from lifelessness, senselessness to life and then to enlightenment. It also signifies the victory of knowledge over ignorance.


The nine forms of Shakti (Nav Durga)


  1. Shailputri - Soil, water, air, fire, sky, all inert matter are the first form of Shailputri.

  2. Brahmāchārini - The spark of knowledge, life in the senseless, is the emergence of another form of energy. You can see it in every sprout.

  3. Chandraghantā - is the third form, where speech manifests in the living being, whose final culmination is speech in human.

  4. Kushmāndā - the one who bears the egg; the power of conception can be seen in all female forms of living beings.

  5. Skandamātā - is the nature of the parents, the nurturing, the protecting power.

  6. Katyāyani - her quality is research which increases knowledge and enable to generate more energy.

  7. Kālrātri is the seventh form of the Goddess. All living beings experience this form at the time of death.

  8. Mahāgauri - her posture is very calm. She symbolizes the passage from darkness to light. In light everything becomes clear and brings peace. This is the form of energy when the conscience of the seeker is awakened.

  9. Siddhidātri - The ninth form is a symbol of knowledge or realization. Only after attaining knowledge, the seeker is enlightened.

Let us not forget that


  • Navratri is filled with symbolisms of victory over evil and the fierce nature.

  • Navratri is the festival of energy, its union and coordination.

  • After worshiping different forms of Shakti during the 9 days of Navratri it is believed that a person becomes powerful and is ready for victory.

  • Indian culture has always been a supporter of valor & bravery.

  • To instil bravery in the life of every person & society Dussehra is also celebrated as 'Vijay-Parva' (Victory celebration)

  • To protect Hinduism, the Maratha jewel Shivaji also left for war against Aurangzeb on this day.

  • The ten heads of Rāvan on one side represent his knowledge of 4 Veds and 6 shāshtrs and at the same time this festival of Vijayadashami inspires us to win over the 10 evils; lust, anger, greed, attachment, pride, jealousy, ego, laziness, violence and theft.

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