हम न भूलें / Hum Naa Bhooleen (08)

मुस्लिम आक्रमण व इस्लाम की स्थापना / Muslim Invasions and spread of Islam


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माना जाता है कि इस्लाम का भारत में आगमन ७वीं [7] शताब्दी में हुआ। कुछ लोग मेथला, केरल में चेरामन जुमा मस्जिद (सन ६२९ [629] में केरल के शासक चेरामन पेरुमल के उत्तराधिकारियों द्वारा निर्मित) ‌तो कुछ घोघा, गुजरात में बरवाड़ा मस्जिद, (किवदंती अनुसार सन ६२३ [623] से पहले निर्मित) तो कुछ तमिलनाडु के पलैया जुम्मा पल्ली (या पुरानी जुम्मा मस्जिद सन ६२८-६३० [628-630]) को भारत की पहली मस्जिद मानते हैं।



उत्तर-भारत में मुस्लिम आक्रमणों से पहले ही इस्लाम अरब व्यापारियों के साथ ७वीं शताब्दी के प्रारम्भ में पश्चिम व दक्षिण भारत में आ गया था। प्राचीन काल से ही अरब और भारतीय उपमहाद्वीपों के बीच व्यापार संबंध अस्तित्व में रहा है। यहां तक कि पूर्व-इस्लामी युग में भी अरब व्यापारी मालाबार क्षेत्र में व्यापार करने आते थे।


भारत में इस्लाम की स्थापना हेतु पहला आक्रमण सं ७११ [711] में मुहम्मद बिन क़ासिम ने किया। वह उमय्यद ख़लीफ़ात (इस्लामी शरिया अनुसार शासन प्रणाली) का एक सेनाध्यक्ष था। उसने इस्लाम के विस्तार के लिए युद्ध में कई नगर लूटे, ध्वस्त किए, बंदी व गुलाम बनाए। इसने सर्वप्रथम भारत में ‘जजिया’ कर लगाया। सिंध प्रान्त पर अधिपत्य ज़माने के बाद उसे अरब वापिस बुला लिया गया और भारत में इस्लाम का विस्तार कुछ समय के लिए रुक गया।


जज़िया एक प्रकार का धार्मिक कर था। इसे मुस्लिम राज्य में रहने वाली गैर मुस्लिम जनता से वसूल किया जाता था। इस्लामी राज्य में केवल मुसलमानों को ही रहने की अनुमति थी और यदि कोई गैर-मुसलमान उस राज्य में रहना चाहे तो उसे जज़िया देना होता था।



सन १००१ [1001] में महमूद गजनी ने राजा जयपाल (जिनका शासन लघमान (उत्तर-पश्चिम अफगानिस्तान का एक शहर) से कश्मीर तक और सरहिंद से मुल्तान तक विस्तृत था) को पराजित किया। हिंदू-मंदिरों पर आक्रमण कर उन्हें लूटना, विध्वंस करना, हिंदू शासकों को कमजोर करना व हिन्दुओं को मारना इसके मुख्य उद्देश्य रहे हैं। उसने हिंदू शासकों को मारा नहीं ताकि वे पुन: अपने राज्य की व्यवस्थाएं सही कर सकें, पुरानी समृद्धि को पाने के लिए कार्य करें और वह उनके कमज़ोर होने के कारण उन्हें पुन: लूट सके। हिन्दुओं व शिया मुस्लमानों पर उसके अत्याचारों से खुश हो कर बग़दाद के इस्लामी (अब्बासी) ख़लीफ़ा ने उसको १०१२ [1012] में सुल्तान की पदवी दी। महमूद गजनी ने भी तब कसम खाई कि वह हिंदुस्तान के ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद (इस्लाम की राह पर चलने के लिए संघर्ष) करेगा और हर साल भारत पर आक्रमण करेगा। उसका १६ वां [16] आक्रमण (कुल १७ [17] आक्रमण) गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर था जब उसने मंदिर की

रक्षा के लिए आए लगभग ५०,००० [50,000] हिन्दुओं का वध किया। इतिहासकारों अनुसार उसने मंदिर के ज्योतिर्लिंग को स्वयं तोडा और ज्योतिर्लिंग के टुकड़ों को अपने साथ अपने शहर ग़जनी ले गया। हिन्दुओं का अपमान करने के लिए उसने १०२६ [1026] में उसके द्वारा बनवाई शहर की नई जामा मस्जिद के प्रवेश-द्वार की सीढ़ियों में ज्योतिर्लिंग के अवशेषों को लगवाया कि मुस्लमान हिन्दुओं के भगवान को अपने पैरों तले रखते हैं। महमूद गजनी हिन्दुओं के लिए अभिशाप था।


भारत में इस्लामी शासन लाने के लिए पाकिस्तान उसे इतना सम्मान देता है कि उसने अपने एक प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) का नाम 'गज़नवी' रखा है।


११७८ [1178] में मोहम्‍मद गोरी ने मुल्‍तान और पंजाब पर विजय पाने के बाद गुजरात की ओर कूच किया। उस समय अन्हिल पट्टन (वर्तमान गुजरात का एक क्षेत्र) पर अल्पव्यस्क मूलराज नामक शासक का शासन था। मूलराज की माता रानी नायका अपने अल्पवयस्क पुत्र की संरक्षिका के रूप में यहां शासन कर रही थी। उन्हें नारी समझकर ही गोरी ने उन पर (अन्हिलवाड़ा की लड़ाई) आक्रमण किया और बुरी तरह से पराजित हुआ। इस युद्ध में गुजरात के सोलंकी राजवंश प्रमुख भीमदेव जी ने ही नहीं अपितु अन्य हिंदू राजाओं ने भी रानी नायका की सहायता की थी। युद्ध हारने के बाद उसने मुल्तान के दक्षिण नहीं अपितु पूर्व की और बढ़ने का निर्णय लिया। उसे यहां भी ११९२ [1192] तक विजय की प्रतीक्षा करनी पड़ी। (देखे: हम न भूलें-06) ११९४ [1194] में राजा जयचंद को मार कर दिल्ली पर उसने अपना आधिपत्य स्थापित किया।


गोरी वर्तमान मध्य-अफगानिस्तान के गोर क्षेत्र से ईरानी मूल का राजवंश था। १०११ [1011] में महमूद गजनी से हारने के बाद ये बौद्ध-मत के अनुयायी इस्लाम स्वीकार कर सुन्नी मुस्लमान बन गए। ११८६ [1186] में इन्होंने ग़ज़नवी साम्राज्य को पूर्णत: उखाड़ फेंका।


हिन्दुओं को अपमानित करने के लिए मोहम्‍मद गोरी ने अपना विजित साम्राज्य अपने प्रिय गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक को सौंप दिया (कमज़ोर हिन्दुओं पर राज करने के लिए गुलाम ही काफी है) और पश्चिमी सीमाओं को दृढ़ करने पश्चिम को निकल गया।


कुतुबुद्दीन ऐबक ने गुलाम वंश की स्थापना की और उसके शासन में इस्लाम का खूब विस्तार हुआ। (देखे: हम न भूलें-03)


भारतीय इतिहास में १२०६-१५२६ [1206-1526] का अंतराल 'दिल्‍ली-सल्‍तनत' के नाम से जाना जाता है। इस अवधि में दिल्‍ली पर पांच वंशों; गुलाम वंश १२०६-९० [1206-90], खिलजी वंश १२९०-१३२० [1290-1320], तुगलक वंश १३२०-१४१३ [1320-1413], सायीद वंश १४१५-५१ [1414-51], और लोदी वंश १४५१-१५२६ [1451-1526] ने शासन किया।


तुगलकों ने लगभग पुरे भारतीय उपमहाद्वीप को अपने आधीन कर लिया था। इतने बड़े साम्राज्य को संभालना आसान नहीं था। व्यवस्थाओं को चलाने के लिए हिन्दुओं पर कर (विशेषकर जज़िया) इतना बढ़ाया गया कि वे दे न पाएँ। किसानों को अपनी आधी से अधिक फसल कर के रुप में देनी पड़ती थी। उत्तरी भारत में गंगा व यमुना नदी के कारण भूमि उपजाऊ थी जिस कारण सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक ने गैर-मुसलमानों पर भूमि कर की दर कुछ जिलों में दस गुना और कुछ में बीस गुना तक बढ़ा दी। परिणाम-स्वरुप कई हिंदू किसानों ने खेती छोड़ने का निर्णय लिया। अपना जीवन बचाने के लिए और जीवन-यापन के लिए कई लोग डाकू बन गए। खेती न होने से अकाल स्वभाविक था। प्रजा में फैलते असंतोष का दमन उसने भी अन्य मुस्लिम शासकों की भाँति अत्याचार व निर्मम हत्याओं से किया।


अप्रैल-१३९८ [1398] से मार्च-१३९९ [1399] के बीच ११ [11] माह का समय उत्तरी भारत में तैमूर लंग की क्रूरता का समय है। १५२६ [1526] में दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोधी को पानीपत की पहली लड़ाई में तैमूर लंग के वंशज बाबर ने हराया। यहाँ से भारत में मुग़ल साम्राज्य का आरम्भ माना जाता है। (क्रमश:)


हम न भूलें कि


  • गोरी वंश के लोग पहले बौद्ध थे। वे महमूद गजनी से अपनी रक्षा नहीं कर पाए और उनका धर्म परिवर्तन हुआ। धर्म परिवर्तन के बाद अहिंसा व उदारता का सिद्धांत उनके साथ न होने पर वे ग़ज़नवी साम्राज्य को नष्ट कर पाए।

  • बौद्ध-भिक्षुओं ने भी मुस्लिम आक्रमणों से हो रही हानि के कारण समयांतर में आत्मरक्षा हेतु अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग स्वीकार किया।

  • वही ज्ञान उत्तम है जो जीव को विषम परिस्थितियों पर विजयी होना सिखाए (नीति) न कि किन्ही सिद्धांतों से जुड़े रहना और अंध-विश्वासी बन जाना।

  • मुस्लिम अत्याचारों (शारीरिक, मानसिक व आर्थिक) को न सह पाने के कारण कई हिंदू मुस्लमान बन गए पर अनेकों ने उनका सामना किया संभवत: जिनके कारण हम आज हैं।

  • जिसने कठिनाइयों का सामना नहीं किया और उनके आगे घुटने टेक दिए वह अपनी पहचान, अपना अस्तित्व खो बैठता है।

  • उस समय के नागरिक को भी कष्ट थे और उसके कष्ट कदाचित हमसे कम नहीं थे।

  • कर्महीनता (उचित शिक्षा न होने से) के कारण ही ५०,००० हिंदू मर गए पर सोमनाथ के मंदिर की रक्षा नही हो सकी। रानी नायका को भी हिन्दुओं के सोऐ क्षत्रित्व को जगाना पड़ा था।

  • जो इतिहास की घटनाओं से सीख लेता है वह उन्नति करता है। जो इतिहास में ही जीता है वह उन्नति नहीं कर पाता बस इतिहास की सफलताओं और असफलताओं की चर्चा में प्रसन्न अथवा उदास होता रहता है। जो इतिहास के महत्त्व को नहीं समझता वह वृक्ष से टूटे एक पत्ते की भांति है जो स्वस्थ तो टूटा है पर वृक्ष से जुड़े पत्तों की तुलना में बहुत शीघ्र नष्ट हो जावेगा।

  • स्वाधीनता वही है जिसमें आप निर्भय हो अपनी संस्कृति, अपनी विचारधारा अनुसार अपने धर्म (धर्म मज़हब नहीं; (देखें हम न भूलें-04) का पालन कर सकें। स्वाधीनता के लिए सक्षम होना अनिवार्य है जो उचित शिक्षा (देखें हम न भूलें-02) के बिना संभव नहीं। पुरुषार्थ के बिना शिक्षा संभव नहीं।

  • कर्महीनता दुखों की जड़ है, दुखों का मूल है।

  • जीवन की मूल आवश्यकताओं (भोजन, वस्त्र व निवास) की पूर्ति के लिए किए कार्य आपको कर्मवीर या कर्महीन नही बनाते। पशु और मनुष्य के बीच का अंतर तो इनकी पूर्ति के बाद आरम्भ होता है।

ऊपर

Muslim Invasions and spread of Islam



Islam is believed to have arrived in India in the 7th century. Some people mention Cheraman Juma Masjid in Methla, Kerala (built by the heirs of Cheraman Perumal, ruler of Kerala in 629) as the first mosque in India whereas for some Barwada Mosque in Ghogha, Gujarat, (according to prevailing stories built before 623) is the oldest mosque and some consider Palaiya Jumma Palli (or Old Jumma Masjid (628- 630)) in Tamil Nadu as the oldest mosque.


Islam came to west and south of India in the early 7th century with Arab merchants even before the Muslim invasions in North India. Trade relations between the Arab and Indian subcontinent have existed since ancient times. Even in the pre-Islamic era, Arab traders used to visit the Malabar coast.


To establish Islam first invasion in India was by Muhammad bin Qasim in year 711. He was an army chief of the Umayyad Caliphate (Caliphate: Islamic Sharia-based governance system). For the expansion of Islam, he looted, demolished, imprisoned and enslaved many cities. He was the first to impose ‘Jazia’ (Jizya) tax in India. After the dominion over Sindh province, he was called back to Arabia and the expansion of Islam in India stopped for some time.


Jazia was a type of religious tax. It was collected from non-Muslims living in a Muslim state. Only Muslims were allowed to live in the Islamic state, and if a non-Muslim wanted to live in that state, he would have to pay Jazia.



In 1001 Mahmud Ghazni defeated King Jaipal, whose rule extended from Laghman (a city in northwest Afghanistan) to Kashmir and from Sirhind to Multan). Plundering and demolishing Hindu temples, killing Hindus and weakening Hindu rulers were his main objectives. He did not kill the Hindu rulers so that they could reinstate their regimes, work to regain the old prosperity and he would then plunder them again. Pleased with his atrocities on Hindus and Shia Muslims, the Islamic (Abbasi) Caliphate of Baghdad gave him the title of Sultan in 1012. On getting the title Mahmud Ghazni vowed that he would conduct jihad (struggle to follow the path of Islam) against the ‘kafirs’ (non-believers of Islam) of Hindustan and invade India every year. His 16th invasion (in total were 17) was at Somnath temple in Gujarat when he killed about 50,000 Hindus who came to protect the temple. According to historians, he personally demolished the “Jyotirling” of the

temple and took its pieces with him to Gazni. In order to insult the Hindus, he installed the remains of the Jyotirling in the stairs of the entrance of the new Jama Masjid in the city built by him in 1026 to highlight that Muslims keep the God of the Hindus under their feet. Mahmud Ghazni was a curse for Hindus.


For bringing Islamic rule in India, Pakistan honoured Ghazni by naming one of their missiles as ‘Ghaznavi’, after him.


In 1178 Mohammad Ghori travelled to Gujarat after conquering Multan and Punjab. At that time Anhil Pattan (a region in modern Gujrat) was ruled by Rani Nayaka as the guardian of her minor son Moolraj. Ghori attacked Anhil Pattan (battle of Anhilwara) and was defeated badly by her. In this war, not only Bhimdev Ji, the Solanki dynasty chief of Gujarat, but other Hindu kings also helped Rani Nayaka. After losing the war, he decided to not to move down south but east of Multan. He had to wait for victory till 1192 (see: Hum Naa Bhooleen-06). He established his kingdom over Delhi by killing King Jaichand in 1194.


Ghori were a dynasty of Iranian origin from the Ghor region of present-day Afghanistan. After losing to Mahmud Ghazni in 1011, these former followers of Buddhism accepted Islam and became Sunni Muslims. In 1186, they completely overthrew the Ghazni empire.


To humiliate the Hindus, Muhammad Ghori gave his beloved slave Qutbuddin Aibak (a slave is enough to rule the weak Hindus) the charge of his conquered territories and went back to strengthen the western borders.


Qutbuddin Aibak established the Slave dynasty and Islam flourished under his rule. (see: Hum Naa Bhooleen-03)


In Indian history, the interval 1206-1526 is known as 'Delhi-Sultanate'. Five dynasties ruled Delhi during this period; The Slave dynasty 1206-90, the Khilji dynasty 1290-1320, the Tughlaq dynasty 1320-1413, the Sayyid dynasty 1414-51, and the Lodi dynasty 1451-1526).


The Tughlaqs had almost subjugated the entire Indian subcontinent. It was not easy to manage such a large empire. Taxes on Hindus (especially Jazia) were raised so much that they could not be paid. Farmers had to pay more than half of their crop as tax. The land in northern India was fertile due to the rivers Ganges and Yamuna and their tributaries. The Sultan Mohammad bin Tughluq raised the land tax rate for non-Muslims by ten times to twenty times in some districts. As a result, many Hindu farmers decided to quit farming. Many people became dacoits to save their lives and livelihood. Famine was natural due to lack of farming. Like other Muslim rulers Mohammad bin Tughluq also suppressed the dissatisfaction spreading among the subjects by using torture and ruthless killings.


The period of 11 months between April-1398 to March-1399 is the time of the cruelty of Taimur Lang in northern India. In 1526, Sultan Ibrahim Lodhi of Delhi was defeated by Babur, a descendant of Taimur Lang, in the first battle of Panipat. It is believed to be the beginning of Mughal Empire in India. (to be continued)


Let us not forget that


  • Ghori dynasty was earlier Buddhist. They could not protect themselves from Mahmud Ghazni. After conversion, when the principles of non-violence and generosity were not with them they were able to destroy the Ghazni empire.

  • Buddhist-monks also accepted the use of weapons for self-defense due to the harm caused by the Muslims.

  • The education (policy), which enables one to overcome difficult situations must be taught and followed rather than to remain associated with any principles and become blind believers.

  • Many Hindus accepted Islam as they were unable to tolerate Muslim atrocities (physical, mental and economic), but many faced them bravely because of whom we probably exist today.

  • One who cannot face difficulties and kneels down before them, loses his identity, his existence.

  • The people of that time also suffered and their sufferings were probably no less than ours.

  • 50,000 Hindus died due to their incapability (lack of proper education), and the temple of Somnath could not be protected. Rani Nayaka also had to awaken the sleeping conscience of Hindu Kshatriy.

  • Those who learn from the events of history, progress and those who live in the past cannot progress. They can just remain happy or sad by discussing the successes or failures in the past. One who does not understand the importance of history is like a healthy leaf of a tree, which detaches itself and will hence perish sooner than the leaves on the tree.

  • Freedom is when you can follow your culture, your ideology, your Dharm (Dharm is not religion; see Hum Naa Bhooleen-04) fearlessly. It is essential to be capable to enjoy freedom which, is not possible without proper education (see Hum Naa Bhooleen-02). Education is not possible without effort.

  • Effortlessness is the root of sorrows.

  • The work done to fulfill the basic necessities of life (food, clothing and shelter) does not make you ‘Karm-veer’ or ‘Karm-heen’. The difference between humans and animals begins after the fulfillment of these basic necessities.

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