Page01_edited.jpg

यह ब्लॉग भारतीय इतिहास और विरासत की घटनाओं को दर्शाता है। हमें उन्हें नहीं भूलना चाहिए। ये घटनाएँ हमें सदैव सीखने के अवसर प्रदान करती हैं। 

This Blog showcases incidents from Indian History and heritage. Let us not forget them. They offer us lessons to learn.

सदस्यता के लिए कृपया "संपर्क / Contact" पृष्ठ पर जाएं 

To subscribe, please visit "संपर्क / Contact" page

अगला लेख:

हिन्दुओं के १६ संस्कार - भाग (९/९)

अंत्येष्टि संस्कार: अन्त्य (अंतिम) + इष्टि (यज्ञ) = अंत्येष्टि। यह शरीर के अंत का संस्कार है। इसके बाद कोई अन्य संस्कार नहीं होता है। इसी को नरमेध, नरयाग, दाह-संस्कार आदि कहा जाता है।  ………… 

 

विज्ञान किसी भी विषय का विस्तृत ज्ञान है व ज्ञान की विवेचना (विचार) बुद्धि द्वारा ही हो सकती है। प्रकृति व प्रकृति के नियम ऐसा विज्ञान हैं जो नित्य है, शाश्वत है व जिसे कभी भी बदला नहीं जा सकता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रकृति के नियमों में परिवर्तन असंभव है। हमारे ऋषि-मुनियों का दृष्टिकोण सदैव वैज्ञानिक रहा है। मानव मनोविज्ञान को समझते हुए हमारे ऋषि-मुनियों ने हमें वह मार्ग बताया है जिसे हमारी बुद्धि तर्क की कसौटी पर स्वीकार कर सके। वह मार्ग प्रकृति के नियमों की भाँति सदैव अटल हो व एक प्रकाश-स्तंभ की भाँति नित्य हमारा मार्गदर्शन करता रहे। वे मानते थे कि जब किसी भी कार्य के उद्देश्य को बुद्धि स्वीकार कर लेगी तो मनुष्य में उस कार्य-पूर्ति के लिए विशेष उत्साह व ऊर्जा का संचार होगा। बुद्धि उद्देश्य के उचित अथवा अनुचित होने के तुलनात्मक निष्कर्ष के उपरांत ही कर्म करने की आज्ञा देगी जिससे अनियंत्रित इच्छाओं पर विजय पाने में भी सफलता मिलेगी। यही कारण है कि आपको लोग यह कहते मिल जाएंगे कि हिन्दू जीवन-शैली विज्ञान से जुडी हुई है। कोई अन्य धर्म, मत-मतान्तर नहीं अपितु सनातन-धर्म ही वैज्ञानिक है। …………

 

 

Next Article:

16 Sanskārs of Hindus - Part (9/9)

antyeśhti sanskār: ‘antya (final) + iśhti (yajna) = antyeśhti’. This is the sacrament of the end of the body. After this no other rituals take place. This sanskār is also called ‘narmedh’, ‘narayāg, ‘dāh- sanskār’ etc.  ..........

 

Science is the detailed knowledge of any subject and knowledge can be enhanced only by developing intellect. Nature and the laws of nature are science which is eternal and does not change. It would not be wrong to say that it is impossible to change the laws of nature. The attitude of our sages has always been scientific. Understanding human psychology, our sages have shown us the path that our intellect can accept on the basis of logic. May that path always be unshakable like the laws of nature and guide us like a beacon of light. Our sages believed that when the intellect accepts the purpose of any work, then there will be a special enthusiasm and energy in a person to fulfill that task. The intellect will give the permission to act only after the comparative conclusion of the objective of its being right or wrong. This will also enable a person to conquer his uncontrolled desires. This is the reason why you find people saying that ‘Hindu way of life’ is related to science. No other religion is scientific, but Sanatan-Dharm.………….

Blog culture education geeta hinduism hindu religion illetracy generosity hum naa bhooleen na bhulen bhuleen health soceity pollution india indian history heritage islam population poverty caste-system food water air technology christian 

© 2020-2023: All Rights Reserved / सर्वाधिकार सुरक्षित

हम न भूलें भूले अन्न पानी हवा इस्लाम उदारता जनसंख्या गरीबी जातिवाद निरक्षरता स्वास्थ्य प्रदुषण प्रौद्योगिकी ब्लॉग भारत भारतीय इतिहास विरासत शिक्षा श्रीमद भगवत गीता धर्म संस्कृति समाज सनातन ईसाई